भारत से लेकर INDIA, कैसे पड़ा था देश का नाम, जानें

इंडिया को हम भारत के नाम से भी जानते हैं। हालांकि, हाल ही में जी20 शिखर सम्मेलन में विदेशी मेहमानों को भेजे गए रात्रि भोज निमंत्रण पत्र में इंडिया की जगह भारत लिखा गया। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस पोडियम से बोला, वहां भी भारत लिखा हुआ था। ऐसे में देश के दो नाम वाली चर्चा ने जोड़ पकड़ लिया है। हालांकि, क्या आपको पता है कि भारत के भारत नाम पड़ने की कहानी क्या है और इसे इंडिया क्यों कहा जाता है। इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।

हाल ही में जी20 शिखर सम्मेलन में विदेशी मेहमानों को राष्ट्रपति की तरफ से भेजे गए भोजन आमंत्रण में India के नाम की जगह भारत लिखा गया था। इसके बाद देश के दो नामों के पीछे चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, क्या आपको पता है कि इंडिया का नाम भारत कैसे पड़ा था और क्या है इंडिया नाम पड़ने की कहानी। इस लेख के माध्यम से हम इस बारे में जानेंगे।

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कहां से आया भारत नाम

भारत, भरत और भारतवर्ष जैसे शब्द शुरू से ही पौराणिक साहित्य और महाकाव्य महाभारत से चर्चाओं में चले आ रहे हैं। यहां तक पुराणों में भी भारत का वर्णन किया गया है।  भारत का यह शब्द देश की सामाजिक-सांस्कृतिक इकाई को भी दिखाता है।

ऐसा भी कहा जाता है कि ऋगवैदिक जनजाति के पूर्वज भारत से देश का नाम भारत आया। वहीं, साल 1927 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भारत की मौलिक एकता की तरफ इशारा करते हुए कहा था कि इंडिया पहले भारत था, जो कि हिंदुओं की पवित्र भूमि से संबंधित है। 

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कैसे पड़ा हिंदुस्तान नाम

हिंदु शब्द एक फारसी शब्द है। वहीं, यह भी कहा जाता है कि हिंदु शब्द संस्कृत के सिंधु शब्द का फारसी रूप है। अब सवाल यह है कि सिंधु शब्द कहां से आया, तो आपको बता दें कि छठी शताब्दी ईसा पूर्व में सिंधु घाटी की चर्चा होने लगी थी।

एकेमेनिड्स के मुताबिक, निचले सिंधु बेसिन की पहचान करने के लिए सबसे पहले सिंधु शब्द का इस्तेमाल किया गया था। वहीं, ईसाई युग की पहली शताब्दी में हिंदु शब्द में प्रत्यय जोड़ा गया, जिसके बाद हमारे सामने हिंदुस्तान शब्द सामने आया।

16वीं शताब्दी तक हिंदुस्तान शब्द का प्रयोग सिंधु-गंगा मैदान की पहचान के लिए प्रयोग में आता था। मुगल इसी शब्द का इस्तेमाल किया करते थे। मुगल सम्राट के क्षेत्रों का वर्णन करने के लिए इस शब्द का इस्तेमाल किया जाता था।

कैसे पड़ा इंडिया नाम

भारत में अंग्रेजों ने करीब 200 साल राज किया। वहीं, 18वीं शताब्दी में ब्रिटिश मानचित्रों पर भारत के नक्शे के लिए इंडिया नाम का प्रयोग किया जाने लगा था। क्योंकि, ग्रेको रोमन संघ और यूरोप में इस शब्द का इस्तेमाल पहले से ही हो रहा था।

समृद्ध क्षेत्र के रूप में वे इस शब्द का इस्तेमाल करते थे और 18वीं शताब्दी में यह शब्द अधिक प्रयोग में आने लगा और अंग्रेजों ने इसे इंडिया कहना शुरू किया। उस समय सर्वे ऑफ इंडिया और नौकरशाही संस्थान इंडिया शब्द का इस्तेमाल करते थे। ऐसे में यह शब्द भारत में तेजी से फैला। 

संविधान में लिया गया इंडिया और भारत

भारतीय संविधान में जब देश के नाम रखने की बात हुई, तो इसमें हिंदुस्तान शब्द को हटा दिया गया और भारत व इंडिया नाम बचा। 17 सितंबर, 1949 में संविधान सभा में बहस छिड़ी और उसमें नाम निकला ‘संघ का नाम और क्षेत्र’।

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ऐसे में अंत में संविधान के अनुच्छेद एक में यह कहा गया कि इंडिया, जो कि भारत है, राज्यों का एक संघ होगा। हालांकि, कुछ सदस्यों ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह हमें औपनिवेशिक समय की याद दिलाता है।

वहीं, हरि विष्णु कामथ ने सुझाव दिया कि भारत जिसे हम अंग्रेजी में इंडिया के नाम से जानेंगे। वहीं, सेठ गोविंद दास ने कहा कि भारत को विदेशों में इंडिया के नाम से जानेंगे, जबकि हरगोविंद पंत ने कहा कि उत्तर भारत के लोग सिर्फ भारतवर्ष चाहते हैं। हालांकि, इन सभी सुझावों को नहीं माना गया और अंत में इंडिया डैट इज भारत ही रहा। 

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Source: tiengtrunghaato.edu.vn

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